शादी-विवाह के मौसम में अक्सर लोग निमंत्रण पत्रों पर देवी-देवताओं की तस्वीरें छपवाते हैं, लेकिन प्रेमाानंद महाराज जी ने इसे उचित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि विवाह कार्ड एक सीमित समय के लिए उपयोग होने वाला कागज है और बाद में अक्सर फेंक दिया जाता है, इसलिए उस पर भगवान के चित्र छपवाना ठीक नहीं है।
महाराज जी के अनुसार, धार्मिक चित्रों का सम्मान बना रहना चाहिए, इसलिए उन्हें ऐसे साधारण छपाई वाले कार्डों पर शामिल करने से बचना बेहतर है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि शादी के कार्ड धार्मिक आस्था के बजाय केवल निमंत्रण के उद्देश्य से ही बनाए जाएँ।
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