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de shiv kumar palampur

राघव शर्मा के मन की व्यथा: इक बार चले आओ, बहुत कुछ अधूरा है आप बिन”

“इक बार चले आओ, पिताजी...आपके बिना बहुत कुछ अधूरा है ” जब भी थकता हूँ, रुकता हूँ,आपके कदमों की छाप ढूंढता हूँ।छोटा-सा मैं, जब डर जाता था,आपकी मुस्कान में पूरा संसार पाता था। आज भी वो सवेरा याद है,जब आपने हाथ थामकर कहा था –“बेटा, देना…
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