मुख्यमंत्री जी प्रदेश मुखिया के नाते यूनिवर्सिटी भी तुम्हारी ओर यहाँ पढने व पढ़ाने वाले भी तुम्हारे फिर सरकार अपनो के ही विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट क्यों चली गई :- प्रवीन कुमार पूर्व विधायक..
मुख्यमंत्री जी प्रदेश मुखिया के नाते यूनिवर्सिटी भी तुम्हारी ओर यहाँ पढने व पढ़ाने वाले भी तुम्हारे फिर सरकार अपनो के ही विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट क्यों चली गई :- प्रवीन कुमार पूर्व विधायक….

यह प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पालमपुर के पूर्व विधायक प्रवीन कुमार ने कहा टूरिजम विलेज को लेकर जिस तरह सरकार ने तानाशाही रुख अपना कर चौधरी सरवन कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर की 280 एकड़ ( 2800 कनाल) जमीन का हस्तांतरण विश्वविद्यालय के शिक्षक, गैर शिक्षक व प्रबंधन बोर्ड को विशवास में लिए विना टूरिजम विलेज के नाम कर दिया । परिणामस्वरूप सरकार के इस फैसले का अधिकांश सामाजिक संस्थाओं, चिन्तकों, विचारकों , बुद्धिजीवीयों व विश्वविद्यालय के ही विभिन्न संगठनों ने सड़कों पर उतर कर कडा विरोध जताया l इन सबका तर्क था जब सरकार के पास पालमपुर में 3300 कनाल भूमि एक समाजसेवी महिला द्वारा दान की गई का विकल्प उपलब्ध है तो फिर 45 वर्षों से स्थापित कृषि विश्वविद्यालय जो समय समय पर जरूरत अनुसार विस्तार कर भूमि का प्रयोग करता आ रहा है तो फिर इसके आकार को इस तरह के फैसलों से सिकोड कर क्यों प्रभावित किया जा रहा है। भविष्य में कृषि इंजीनियरिंग, मत्स्य पालन और बिजनेस मैनेजमेंट जैसे महत्वपूर्ण महाविद्यालयों की स्थापना पर संकट खड़ा हो गया है । नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत वहुसंकाय विश्वविद्यालय के विस्तारीकरण पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया है । इस तरह सरकार के कानों में जरा सी भी जूं तक न रेंगने के कारण विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ को सरकार के इस फैसले से खफा होकर मान्य उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा । पूर्व विधायक ने हैरानी प्रकट करते हुए कहा कि लोकतन्त्र में जनता की आवाज को प्राथमिकता देना और जनमानस की भावनाओं की कदर करना स्थापित संविधान की ली गई शपथ के अनुरूप चुने हुए जन प्रतिनिधियों का परम धर्म है। लेकिन यहाँ प्राइवेट संस्था के साथ किसी प्रकार की डील को लेकर शासक ही भक्षक बन जाएं तो यह समाज के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। पूर्व विधायक ने तर्क के साथ कहा कायदे के तहत तो सरकार को सरकार के फैसले के विरुद्ध सडको पर उतरी जनता का पक्ष सुनना चाहिए था न कि मंहगे वकील करके जनता की इस आवाज़ को कुचलने के लिए सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में अपनी जनता के विरुद्ध नहीं जाना चाहिए था । अपने ही प्रदेश की सुप्रीम अदालत में बैठकर इस उपजे विवाद का समाधान करना चाहिए था । पूर्व विधायक ने कहा अव सरकार ने फिर सड़कों पर उतरी जनता को मान्य सर्वोच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखने के लिए वकील की फीस देने हेतु धन संग्रह करने वास्ते मजबूर कर दिया जबकि सरकार सरकारी खर्चे पर जनता का ही टैक्स का पैसा सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को जनहित की इस आवाज को कुचलने पर लुटाएगी । पूर्व विधायक ने कहा एकतरफ सरकार वित्तीय अभाव के कारण वार वार कर्जा उठा रही है दूसरी और बेवजह जनता की भावनाओं के विपरीत महंगे वकीलों पर खर्च कर रही है। पूर्व विधायक ने कहा आम जन मानस द्वारा पालमपुर में टूरिजम विलेज का कतई विरोधी नहीं है, विरोध सिर्फ कृषि विश्वविद्यालय की ज़मीन के हस्तांतरण को लेकर है। ऐसे में जन साधारण की आवाज है कि इस टूरिजम विलेज को पालमपुर की जिस महान दानवीर सेविका ने सरकार को 3300 कनाल भूमि पालमपुर के निकट दान के रुप में दी है। वहाँ स्थापित किया जाए । वैसे भी यह दान की गई जमीन देहाती टूरिजम विलेज की परिभाषा में आती है न कि नगर निगम पालमपुर के दायरे में आने वाले कृषि विश्वविद्यालय की।
पूर्व विधायक ने कहा जिस राज हठ के चलते सरकार ने कृषि विश्वविद्यालय की जमीन को टूरिजम विलेज के नाम हस्तांतरण की प्रतिष्ठा ठान ली है ऐसे में सरकार भविष्य में इस विश्वविद्यालय की प्रगति , विस्तारीकरण,भारतवर्ष के कृषि प्रधान देश में कृषि शिक्षा के प्रचार , प्रसार एवं अनुसंधान व पदोन्नति में बाधा डालने के प्रयास पर अडिग है।

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