Dr. Shiv : तुम मुझे यूं भुला न पाओगे.. डॉ. शिव कुमार की विरासत—सेवा, समर्पण और संकल्प की प्रेरणा

चलो... हम भी कुछ लौटाएं, निस्वार्थ और निस्संदेह

Parvinder Bhatia, Chief, Shani Seva Sadan, Palampur

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Shani Seva Sadan PALAMPUR

डॉ. शिव कुमार की विरासत—सेवा, समर्पण और संकल्प की प्रेरणा

RAJESH SURYAVANSHI, CHAIRMAN MISSION AGAINST CORRUPTIONcum Editor-in-Chief, HR MEDIA GROUP

डॉ. शिव कुमार—एक ऐसा नाम, जिसने अपनी पहचान किसी पद, प्रतिष्ठा या संपत्ति से नहीं, बल्कि सेवा के संकल्प और जनकल्याण के भाव से बनाई। आज जब शनि सेवा सदन, पालमपुर में उनकी जयंती पर उनकी पत्नी डॉ. विजय शर्मा द्वारा समाज सेवा हेतु अर्पित राशि सौंपी गई, तो वह केवल एक चेक नहीं था—वह उनके जीवन-मूल्यों की पुनः उद्घोषणा थी।

Dr Shiv Kumar, Father of Rotary Eye Hospiral, Internationally acclaimed Social Worker & Founder CHAIRMAN, Rotary Eye Foundation

इस अवसर पर उनके पुत्र राघव शर्मा का सदन में उपस्थित होना, एक पीढ़ी द्वारा दूसरी पीढ़ी को सौंपा वह मशाल है, जो समाज में रोशनी फैलाती रहेगी।

यह दृश्य केवल एक पारिवारिक श्रद्धांजलि नहीं था, बल्कि उस आदर्श की सार्वजनिक पुनःस्थापना थी, जिसे आज की भागदौड़ और स्वार्थपरता में खोता जा रहा है—निस्वार्थ सेवा।

डॉ. शिव कुमार ने जब व्यवसायिक सफलता के रास्ते खुले थे, उन्होंने समाज सेवा का कठिन और कम प्रशंसित मार्ग चुना। अनाथ बच्चों की परवरिश, बुजुर्गों के लिए आश्रम, और रोजगार सृजन के उनके प्रयास, किसी सरकारी योजना से अधिक असरदार और मानवीय रहे। लेकिन उनका सबसे अद्भुत योगदान ‘रोटरी आई हॉस्पिटल’ है, जो अब एक संस्थान नहीं, एक दृष्टि है—आंखों की भी और समाज की भी।

आज यह अस्पताल न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि पड़ोसी राज्यों के हजारों मरीजों के लिए प्रकाश का केंद्र बन चुका है। उन्होंने इसे केवल इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि मानवता का घर बनाया। यही कारण है कि डॉ. शिव कुमार पेंशन योजना जैसी पहलें आज भी उनकी सोच को जीवंत बनाए हुए हैं।

शनि सेवा सदन के श्री परमिंदर भाटिया का यह कथन बिल्कुल सही है कि “डॉ. साहब ने सिखाया कि सेवा केवल कर्म नहीं, आत्मा का विस्तार है।” यह विचार आज के सामाजिक परिदृश्य में और अधिक प्रासंगिक हो गया है, जहाँ दिखावे और प्रचार के शोर में सच्ची सेवा दब जाती है।

आज जब समाज को नेतृत्व की नई दिशा चाहिए, डॉ. शिव कुमार जैसे व्यक्तित्व आदर्श की तरह सामने आते हैं। उनकी विरासत हम सबके लिए एक दायित्व है—कि हम भी कुछ लौटाएं, निस्वार्थ और निस्संदेह।

“आपके बिना सब अधूरा है पिता…”

RAGHAV SHARMA, GM, Rotary Eye Hospital, Maranda

जब भी थकता हूँ, रुकता हूँ,
आपके कदमों की छाप ढूंढता हूँ।
छोटा-सा मैं, जब डर जाता था,
आपकी मुस्कान में पूरा संसार पाता था।

आज भी वो सवेरा याद है,
जब आपने हाथ थामकर कहा था –
“बेटा, देना सीखो…
ये दुनिया तब सुंदर लगेगी।”

आपने व्यापार नहीं चुना,
बल्कि जीवन को सेवा में बुन दिया।
अनाथों के लिए आपने छत बनाई,
अंधेरों को रोशनी सिखाई।

आपने नहीं कहा, “मुझे देखो,”
आपने कहा, “मुझे समझो।”
हर असहाय की आँखों में
आपका चेहरा उग आता है।

पिता, आज मैं खड़ा हूँ उस मोड़ पर,
जहाँ आप थे एक वटवृक्ष बनकर।
मेरा मन बार-बार पूछता है—
क्या मैं भी आपके जैसा बन पाऊँगा?

शनि सेवा सदन की दीवारें,
आज भी आपकी साँसें सुनती हैं।
रोटरी आई हॉस्पिटल की रोशनी,
अब भी आपके नाम से चलती है।

आज माँ ने जो दिया समाज को,
वो आपकी सोच की ही परछाई है।
हम सब केवल माध्यम हैं पिता,
आपकी करुणा की सच्ची गवाही है।

आप चले गए, पर रुके नहीं,
आप हर उस मुस्कान में हैं, जो आपने लौटाई थी।
पिता जी, मेरा प्रण है,
आपके हर अधूरे स्वप्न को साकार करूँ।

आप अमर हैं,
हमारी साँसों में, सेवा में, और समर्पण में।
पिता जी… आप आज भी हमारे साथ हैं।

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