भंडाफोड़ : CM सुखविंदर सुक्खू को धोखा: राज्यपाल और कार्यवाहक कुलपति की तानाशाही में विपक्षी और आरएसएस समर्थकों की अनुचित भर्तियों का खेल, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का भी अपमान
मुख्यमंत्री को धोखे में रखकर चल रही है तानाशाही: विश्वविद्यालय में हो रही पक्षपाती भर्तियाँ








मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू को धोखा: राज्यपाल और कार्यवाहक कुलपति की तानाशाही में विपक्षी और आरएसएस समर्थकों की अनुचित भर्तियों का खेल, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का भी अपमान
विशेष रिपोर्ट: राजेश सूर्यवंशी, एडिटर-इन-चीफ, HR मीडिया ग्रुप


पालमपुर स्थित चौधरी सरवन कुमार कृषि विश्वविद्यालय (CSKHPKV) में इन दिनों एक बेहद संवेदनशील और गंभीर प्रशासनिक मुद्दा उभरकर सामने आया है। विश्विद्यालय के कार्यवाहक कुलपति डॉ. नवीन कुमार और राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल (जो इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं) पर विपक्ष समर्थित उम्मीदवारों और आरएसएस के नजदीकी लोगों को फायदा पहुँचाने के लिए अनुचित रूप से भर्तियां निकालने का गंभीर आरोप लग रहा है। इन सभी घटनाओं से साफ जाहिर होता है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू की आंखों में जानबूझकर धूल झोंकी जा रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने हाल ही में जिन भर्तियों को लेकर विज्ञापन जारी किए हैं, वे न केवल संविधान की भावना के विरुद्ध प्रतीत होते हैं, बल्कि यह कार्यवाहक कुलपति की सीमित शक्तियों के भी बाहर है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, कोई भी कार्यवाहक कुलपति ऐसे बड़े फैसले नहीं ले सकता, जिनका दीर्घकालिक प्रभाव संस्था पर पड़े।
इस पूरे प्रकरण में जब India Reporter Today की ओर से कार्यवाहक कुलपति डॉ. नवीन कुमार से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने न तो 7 कॉल रिसीव की और न ही मैसेज का कोई उत्तर दिया। यानी एक संवेदनशील मुद्दे पर मीडिया से बचने की कोशिश की गई, जो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का सीधा अपमान है।
इसके विपरीत, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने फोन कॉल पर अधूरी जानकारी देने के बाद बातचीत बीच में ही समाप्त कर दी, जो दर्शाता है कि या तो वे दबाव में हैं, या फिर जानबूझकर सच को छिपाया जा रहा है।
जब रजिस्ट्रार से यह पूछा गया कि एक प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते आपकी क्या प्रतिक्रिया है, तो उन्होंने सीधा उत्तर देने के बजाय फोन काट दिया। इससे साफ प्रतीत होता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है और “दाल में कुछ काला है।”
एक विश्वसनीय सूत्र ने खुलासा किया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से राज्यपाल और कार्यवाहक कुलपति की मिलीभगत से विपक्षी दल—विशेषकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)—के करीबियों को पद देने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू की व्यस्तता का अनुचित लाभ उठाते हुए यह पूरा खेल रचा जा रहा है।
इतना ही नहीं, व्हाट्सएप पर पूछे गए विस्तृत सवालों का कोई औपचारिक उत्तर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से नहीं दिया गया। जबकि किसी भी सार्वजनिक संस्था का दायित्व है कि वह पारदर्शिता बनाए रखे और पत्रकारों के सवालों का जवाब दे।
यह सब घटनाक्रम इस ओर इशारा करता है कि हिमाचल प्रदेश में संवैधानिक मर्यादाओं की अनदेखी हो रही है। कार्यवाहक कुलपति की सीमित शक्तियों का उल्लंघन कर भर्तियों को विज्ञापित करना, लोकतंत्र और न्याय के सिद्धांतों की सीधी अवहेलना है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू को इस पूरे घटनाक्रम पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और एक निष्पक्ष जांच बैठानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इन भर्तियों के पीछे कौन-कौन से चेहरे हैं, जो संविधान और लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।
“NSUI और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की इज़्ज़त दांव पर लगी है, और इस पूरे प्रकरण पर स्थानीय नेता चुप्पी साधे बैठे हैं — जो कई सवाल खड़े करता है। ऐसा प्रतीत होता है कि पूरी दाल ही काली है। बड़े नेताओं की कार्यशैली सवालों के घेरे में है।”
राज्यपाल और कार्यवाहक कुलपति की कथित तानाशाही, संवैधानिक मर्यादाओं की अवहेलना और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का अपमान हिमाचल प्रदेश के भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। यह समय है जब मुख्यमंत्री को सजग होकर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, वरना शिक्षा संस्थान राजनीतिक अखाड़ों में तब्दील हो जाएंगे।
“ऐसा प्रतीत होता है कि ये सभी लोग मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ हो रही साज़िश में आपस में मिले हुए हैं, क्योंकि कार्यवाहक कुलपति ने सबको विश्वास में ले रखा है।”
A regrettable state of affairs indeed
The query ignored by Acting VC Dr Naveen Kumar..… “The query was ignored by Acting Vice Chancellor Dr. Naveen Kumar, raising serious concerns about transparency and accountability within the institution. Despite repeated follow-ups, no response or acknowledgment has been received, which reflects poorly on the current administrative approach.
Sincerely,
Senior Journalist Rajesh Suryavanshi, *Govt Accredited,*
Editor-in-Chief
Mob.. 8988539600
It’s time bound please, pls clarify before 9 pm today. Thanks and regards.
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