राज्यपाल की मनमानी पर भड़की सुक्खू सरकार — शिक्षा व्यवस्था पर संकट, राष्ट्रपति ने मांगी CJI से राय, सरकार को मिली संवैधानिक बढ़त, अब तो पूरा भारत इस मामले पर टकटकी लगाए देख रहा है कि आखिर राज्यपाल क्यों अपना पसंदीदा कुलपति मनमाने तरीके से नियुक्त करने पर अड़े हुए हैं तथा बार-बार माननीय उच्च न्यायालय की तीखी टिप्पणियों के शिकार हो रहे हैं

Dr Sushama Sood
Sukhu Govt
Dr. Sushma women care hospital, LOHNA PALAMPUR
Dr. Swati Katoch Sood, & Dr. Anubhav Sood, Gems of Dental Radiance
DENTAL RADIANCE
DENTAL RADIANCE HOSPITAL PALAMPUR TOUCHING SKY

राज्यपाल की मनमानी पर भड़की सुक्खू सरकार — शिक्षा व्यवस्था पर संकट, राष्ट्रपति ने मांगी CJI से राय, सरकार को मिली संवैधानिक बढ़त

शिमला | विशेष रिपोर्ट
Rajesh Suryavanshi,
Editor-in-chief

हिमाचल प्रदेश में विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर राज्यपाल और सुक्खू सरकार के बीच टकराव अब संवैधानिक विवाद का रूप ले चुका है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि लोकतांत्रिक ढांचे में राज्यपाल की मनमानी स्वीकार्य नहीं होगी

💢राज्यपाल की चुप्पी और सुक्खू सरकार का धैर्य

Thakur Sukhvinder Singh Sukhu, CM HP

पिछले वर्ष भी जब विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक राज्यपाल को भेजा गया था, तो उन्होंने न मंज़ूरी दी, न उसे वापस लौटाया।
इस बार वही बिल विधानसभा ने दोबारा पारित कर भेजा, तो राज्यपाल के पास एक माह का समय था, लेकिन उन्होंने समयसीमा के भीतर कोई कार्रवाई नहीं की।

संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत अब यह विधेयक स्वतः पारित माना गया है, और सुक्खू सरकार अपने विवेक से कुलपतियों की नियुक्ति करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।

👺नियमों की धज्जियां उड़ा रहे राज्यपाल

कानून स्पष्ट कहता है कि विश्वविद्यालय अधिनियम में कार्यवाहक कुलपति नियुक्त करने का कोई प्रावधान ही नहीं है, फिर भी राज्यपाल मनमानी तरीके से अपने पसंदीदा लोगों को कार्यवाहक कुलपति नियुक्त कर रहे हैं।
यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि राज्य की उच्च शिक्षा प्रणाली की गरिमा पर सीधा प्रहार भी है।
सरकार का तर्क है कि जब कुलपति का पद दो वर्ष से रिक्त है, तो “अस्थायी अनुपस्थिति” की कोई स्थिति बनती ही नहीं।

💥हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी:

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने डॉ. राकेश कुमार कपिला बनाम राज्य हिमाचल प्रदेश मामले में कहा कि कार्यवाहक कुलपति की नियुक्ति वरिष्ठता और अधिनियम दोनों के विपरीत है।
अदालत ने माना कि राज्यपाल का यह रवैया विश्वविद्यालय अधिनियम 1986 की धारा 24(5) का खुला उल्लंघन है।

⚖️राष्ट्रपति ने मांगी CJI से राय

Shiv Pratap Shukl, Governor

अब यह विवाद राष्ट्रपति तक पहुंच चुका है। राष्ट्रपति ने इस संवैधानिक मसले पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से राय मांगी है जिनकी राय इसी माह आने वाली है।
परंतु यह राय सलाह मात्र होगी, बाध्यकारी नहीं — यानी हिमाचल सरकार चाहे तो माने, चाहे न माने।
राज्यपाल का यह कहना कि यह “CJI का फैसला” होगा, पूरी तरह भ्रामक है, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति केवल reference मांग सकते हैं, निर्णय नहीं।

Sukhu sarkar

सुक्खू सरकार का कहना है कि राज्यपाल की निष्क्रियता और मनमानी से शिक्षा संस्थानों का संचालन ठप पड़ रहा है।
सरकार के अनुसार विधानसभा सर्वोच्च संस्था है, और राज्यपाल की भूमिका केवल औपचारिक अनुमोदन तक सीमित है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा, “राज्यपाल का मौन लोकतंत्र की भावना के विपरीत है। जब जनता ने हमें चुना है, तो नीति निर्धारण का अधिकार भी हमारा ही है।”

✍️My Opinion….

RAJESH SURYAVANSHI, CHAIRMAN MISSION AGAINST CORRUPTIONcum Editor-in-Chief, HR MEDIA GROUP

अब जबकि बिल स्वतः पारित माना गया है, हिमाचल प्रदेश सरकार स्थायी कुलपतियों की नियुक्ति स्वतंत्र रूप से कर सकेगी।
यह फैसला न केवल शिक्षा व्यवस्था के पुनर्गठन की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि संविधान में निर्वाचित सरकार की इच्छा सर्वोपरि है, न कि संवैधानिक पदों की मनमानी।

Two Years of Sukhu Govt

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