बधाई हो! मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने व्यवस्था परिवर्तन का रचा एक और इतिहास, 29 महीने बाद CSKHPKV पालमपुर को मिलेगा नियमित कुलपति

बधाई हो! मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने व्यवस्था परिवर्तन का रचा एक और इतिहास, 29 महीने बाद CSKHPKV पालमपुर को मिलेगा नियमित कुलपति

सुक्खू सरकार ने अधिसूचित किए नए नियम, चयन प्रक्रिया तय

शिमला/पालमपुर।
राजेश सूर्यवंशी,
एडिटर-इन-चीफ, HR MEDIA GROUP

करीब 29 महीनों से खाली पड़े कुलपति पद को भरने की दिशा में सुक्खू सरकार ने अहम कदम उठाया है। चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय (CSKHPKV), पालमपुर को अब शीघ्र ही नियमित कुलपति मिलने का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने कुलपति नियुक्ति से जुड़े नए नियम अधिसूचित कर दिए हैं, जिससे विश्वविद्यालय में लंबे समय से चला आ रहा प्रशासनिक अस्थायित्व समाप्त होने की उम्मीद है।

कृषि विभाग द्वारा 6 जनवरी 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, हिमाचल प्रदेश कृषि, उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय अधिनियम, 1986 की धारा 55-A के तहत कुलपति नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट कर दी गई है। इससे भविष्य में नियुक्तियों में देरी की संभावना भी खत्म होगी।

राज्य सरकार की सलाह पर होगी नियुक्ति

नए नियमों के अनुसार कुलपति की नियुक्ति राज्य सरकार की सलाह पर राज्यपाल (कुलाधिपति) द्वारा की जाएगी। इसके लिए सर्च-कम-सेलेक्शन कमेटी गठित की जाएगी, जो तीन योग्य उम्मीदवारों का पैनल राज्य सरकार को भेजेगी। सरकार पैनल में से एक नाम चुनकर कुलाधिपति को भेजेगी। कुलाधिपति को एक सप्ताह के भीतर नियुक्ति करनी होगी, अन्यथा कृषि/उद्यानिकी विभाग के प्रशासनिक सचिव नियुक्ति अधिसूचना जारी करेंगे।

उच्चस्तरीय चयन समिति

चयन समिति में मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश अध्यक्ष होंगे। इसके अलावा आईसीएआर के महानिदेशक या उनके समकक्ष अधिकारी, कुलाधिपति का नामित वरिष्ठ शिक्षाविद, राज्य सरकार का वरिष्ठ नामित अधिकारी तथा कम से कम 15 वर्ष अनुभव वाला कृषि, उद्यानिकी या पशु चिकित्सा विज्ञान का विशेषज्ञ प्रोफेसर शामिल होगा।
इससे चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने का दावा किया गया है।

योग्यता, कार्यकाल और आयु सीमा तय

कुलपति पद के लिए उम्मीदवार का कम से कम 10 वर्ष प्रोफेसर के रूप में अनुभव होना अनिवार्य किया गया है।

उच्च शैक्षणिक स्तर, प्रशासनिक दक्षता और ईमानदारी को भी आवश्यक बताया गया है। कृषि अनुसंधान सेवाओं में लगभग 20 वर्षों के अनुभव को वरीयता दी जाएगी। कुलपति का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा, जिसमें एक बार पुनर्नियुक्ति संभव है, लेकिन अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष निर्धारित की गई है।

विश्वविद्यालय को मिलेगा स्थायी नेतृत्व

CSKHPKV पालमपुर में पिछले 29 महीनों से नियमित कुलपति न होने के कारण नीतिगत फैसले, शोध गतिविधियां और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहे थे। अब नियम अधिसूचित होने के बाद विश्वविद्यालय को स्थायी और पूर्णकालिक नेतृत्व मिलने की उम्मीद जगी है।

सुक्खू सरकार को श्रेय

शिक्षा और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को सुक्खू सरकार का दूरदर्शी कदम माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित मुद्दे को नियमों के दायरे में सुलझाकर सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि राज्य के विश्वविद्यालयों में अब अस्थायी व्यवस्थाओं की जगह पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन को प्राथमिकता दी जाएगी।

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