अविश्वसनीय : आज दिन तक न राजस्व विभाग न टी सी पी ओर न ही नगर निगम चिम्वलहार के ग्रीन एरिया की हद को चिन्हित कर पाए :- प्रवीन कुमार पूर्व विधायक …..

आज दिन तक न राजस्व विभाग न टी सी पी ओर न ही नगर निगम चिम्वलहार के ग्रीन एरिया की हद को चिन्हित कर पाए :- प्रवीन कुमार पूर्व विधायक …..

Er. VARUN SHARMA, BUREAU CHIEF, PALAMPUR, Mob : 9817 999992

सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश में पारिस्थितिक असंतुलन की ओर ध्यान दिलाते हुए चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में बदलाव नहीं किया गया तो पूरा राज्य विलुप्त हो जाएगा। यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि हिमाचल मे स्थिति बद से बदतर होती जा रही है परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन का राज्य पर स्पष्ट और चिंताजनक प्रभाव पड़ रहा है। मान्य सर्वोच्च न्यायालय की उपरोक्त गम्भीर चिन्तनीय टिपण्णी पर समाज सेवा में समर्पित इन्साफ संस्था के अध्यक्ष एवं पालमपुर के पूर्व विधायक प्रवीन कुमार ने कहा कि डेढ दशक पूर्व जव उन्होंने पालमपुर विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत चिम्वलहार में मकान बनाने के लिए जमीन खरीदी तो उस वक्त के राजस्व विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों ने उन्हें अवगत करवाया गया कि साथ लगती हद के आगे ग्रीन एरिया है यहाँ किसी प्रकार की कोई कंस्ट्रक्शन नहीं हो सकती । यह ग्रीन बैलट ही रहेगी, लेकिन उसके उपरान्त जव यहाँ अंधाधुंध जमीन की खरीदो फरोख्त होने लगी तो उस सवाल के जवाब में आज दिन तक महकमा माल , टी सी पी व नगर निगम यहाँ के ग्रीन एरिया की परिभाषा को परिभाषित नहीं कर पाये । पूर्व विधायक ने कहा न्यायधीश जे.बी पारदीवाला और न्यायधीश महादेवन की पीठ ने कहा कि हम राज्य सरकार और भारत संघ को यह समझाना चाहते है कि राजस्व अर्जित करना ही सब कुछ नही है । कड़ी चेतावनी देते हुए मान्य न्यायालय ने कहा कि अगर ऐसे ही चलता रहा तो वह दिन दूर नही जब हिमाचल देश के नक्शे से गायब हो जाएगा। ऐसे में हिमाचल को अपने विकास के मॉडल का पुनर्विलोकन करना होगा । यहाँ पहाडी भवनशैली को दरकिनार कर फ्लैट कल्चर को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह फ्लैट हिमाचलियो के लिए कम और प्रवासियों के लिए अधिक बन रहे है। चारों तरफ मकान ही मकान दिखाई देने लगे। अब यह पहाड़ों का प्रदेश नही कंक्रीट का प्रदेश बन कर रह गया है। पूर्व विधायक ने कहा कृषक भूमि और ग्रीन एरिया का लैंड यूज चेंज नही होना चाहिए । उन्होंने कहा हिमाचल के विकास मॉडल का पुनर्विलोकन कर पहाड़ और पहाड़ी संस्कृति के अनुरूप मॉडल तैयार किया जाना चाहिए । इसी के साथ पूर्व विधायक ने स्थानीय प्रशासन के माध्यम से यह भी जानना चाहा है कि ग्रीन ट्रव्युनल अपने विवेक से भी काम लेता है या शिकायत का ही इन्तजार करता है।

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