लौहपुरुष मुख्यमंत्री सुक्खू बने भारत के रोल मॉडल.. पूरे भारत में बने चर्चा का विषय, बटोर रहे हैं सुर्खियाँ, चिट्टा-विरोधी लड़ाई से सुरक्षित कर रहे हैं प्रदेश का भविष्य

Sumit Nanda
Press Correspondent

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू: भारत के लिए उभरते रोल मॉडल, चिट्टा-विरोधी लड़ाई से सुरक्षित कर रहे हैं प्रदेश का भविष्य

हिमाचल के लौहपुरुष: मुख्यमंत्री सुक्खू का चिट्टा-विरोधी संकल्प और जन-जागरण

Rajesh Suryavanshi, Editor-in-Chief, HR MEDIA GROUP, CHAIRMAN : Mission Again st CURRUPTION, H.P., Mob : 9418130904, 898853960)

 

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चिट्टा और नशे के बढ़ते खतरे के विरुद्ध एक व्यापक और निर्णायक अभियान छेड़कर न केवल राज्य के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है, बल्कि एक आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध हिमाचल के निर्माण का नया अध्याय भी आरंभ किया है।

Sukhu Govt

शिमला के रिज से चौड़ा मैदान तक आयोजित ‘‘चिट्टा-मुक्त हिमाचल वाकाथॉन’’ में मुख्यमंत्री सुक्खू स्वयं अग्रिम पंक्ति में चलकर हजारों युवाओं, महिलाओं, बच्चों और अधिकारियों का नेतृत्व करते दिखाई दिए। जनसहभागिता से प्रेरित यह अभियान देवभूमि को नशे के काले साये से मुक्त करने के संकल्प का सशक्त प्रतीक बन चुका है। सुक्खू का यह कथन कि “प्रदेश तभी सशक्त और समृद्ध बनेगा, जब इसके बच्चे और युवा स्वस्थ होंगे” उनके दृढ़ निश्चय और स्पष्ट दृष्टि को उजागर करता है।

चिट्टा के खिलाफ कठोर कार्रवाई और जीरो टॉलरेंस नीति

सुक्खू सरकार ने चिट्टा तस्करी और नशा कारोबार के विरुद्ध सख्त और प्रभावी कदम उठाए हैं।

60 सरकारी कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है, जिनमें 15 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

नशीली दवाओं से अर्जित संपत्तियों के संबंध में 10 दिसंबर तक विस्तृत जानकारी देने के निर्देश जारी किए गए हैं।

सूचना प्रदान करने वाले नागरिकों के लिए 10,000 से 10 लाख रुपये तक के पुरस्कार की घोषणा की गई है।

Chief Minister S.S. Sukhu

धर्मशाला में 2.2 किलोमीटर की दौड़ का नेतृत्व करते हुए मुख्यमंत्री ने नशा माफिया को स्पष्ट संदेश दिया कि देवभूमि में उनकी कोई जगह नहीं है। सरकार ने PIT-NDPS एक्ट के तहत कठोर प्रावधान लागू किए हैं, जिनमें उम्रकैद से लेकर मौत की सजा, 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और अवैध संपत्ति की जब्ती शामिल है। साथ ही, स्कूल पाठ्यक्रम में नशा-जागरूकता को अनिवार्य कर दिया गया है। ये सभी कदम हिमाचल को नशा-मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।

आत्मनिर्भर हिमाचल का मार्ग और युवा शक्ति

मुख्यमंत्री सुक्खू का विज़न केवल नशा-निरोध तक सीमित नहीं है। वे एक ऐसे हिमाचल के पक्षधर हैं जो केंद्र सरकार की मदद पर निर्भर न रहकर स्वयं के संसाधनों और मजबूत युवा शक्ति के बल पर आगे बढ़े। उनका मानना है कि चिट्टा-मुक्त युवा ही पर्यटन, कृषि, उद्योग और उद्यमिता के क्षेत्रों में हिमाचल को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएंगे।

सुक्खू ने मातृशक्ति, धार्मिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों और युवाओं से इस अभियान को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने का आह्वान किया है। देशभर में उनकी इस पहल की सराहना हो रही है, और उन्हें चिट्टा-विरोध की लड़ाई का सबसे प्रखर और प्रभावी नेतृत्वकर्ता माना जा रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रेरक नेतृत्व

भ्रष्टाचार-विरोधी छवि के लिए विख्यात मुख्यमंत्री सुक्खू अब नशा-विरोधी अभियान के नेतृत्व में एक राष्ट्रीय भूमिका मॉडल के रूप में उभर रहे हैं। 1,000 स्वयंसेवकों की विशेष टीम गठित करने और पुनर्वास केंद्रों के विस्तार की घोषणा उनके दूरदर्शी नेतृत्व एवं मानवीय संवेदनशीलता को रेखांकित करती है।

Sukhu sarkar

मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश है—“हिमाचल का भविष्य तभी सुरक्षित होगा, जब इसके बच्चे और युवा सुरक्षित होंगे।”
इसी मूल मंत्र के साथ हिमाचल की जनता उनके साथ खड़ी है, जिससे यह अभियान एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन का रूप ले चुका है और सफलता की दिशा में दृढ़ता से अग्रसर है।

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