NSUI ने एसडीएम पालमपुर नेत्रा मेती के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, कुलपति नियुक्ति विवाद पर जताई कड़ी आपत्ति


एनएसयूआई ने एसडीएम पालमपुर नेत्रा मेती के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, कुलपति नियुक्ति विवाद पर जताई कड़ी आपत्ति

पालमपुर, २४ जून: डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी और सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर की एनएसयूआई इकाई ने आज उपमंडल अधिकारी (एसडीएम), पालमपुर को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें कुलपति की हालिया नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए आग्रह किया गया कि यह मामला मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश के समक्ष उठाया जाए।
एनएसयूआई अध्यक्ष सचिन के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में कुलपति की नियुक्ति को “असंवैधानिक और गैरकानूनी” ठहराया है। आरोप है कि यह नियुक्ति विश्वविद्यालय अधिनियम की अनदेखी करते हुए और राज्यपाल द्वारा मनमानी शर्तें लागू कर की गई, जिससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और पारदर्शिता को गहरी ठेस पहुंची है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने पारदर्शी और योग्यता आधारित नियुक्तियों के लिए संबंधित अधिनियमों में संशोधन विधेयक 18 माह पूर्व ही पारित कर दिए थे, लेकिन राज्यपाल द्वारा अब तक उन्हें स्वीकृति नहीं दी गई है। एनएसयूआई का कहना है कि यह स्थिति हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय के खिलाफ है जिसमें स्पष्ट किया गया है कि राज्यपालों को निर्वाचित विधायिका द्वारा पारित विधेयकों को अनिश्चितकाल तक रोकने का अधिकार नहीं है।
ज्ञापन में विशेष रूप से तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा गया है:
“इसी तरह की परेशानियों से तमिलनाडु सरकार भी परेशान थी। वहां भी मनमाने निर्णय लेने पर राज्यपाल को फटकार लगाई गई थी और सभी विश्वविद्यालयों में सरकार की मर्जी से कुलपतियों की तैनाती की गई थी। ऐसा ही हिमाचल प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में भी होना अब अनिवार्य है।”
एनएसयूआई की तीन प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
राज्यपाल लंबित संशोधन विधेयकों को तुरंत स्वीकृति प्रदान करें।
सभी कुलपति नियुक्तियां संशोधित अधिनियमों के अनुसार हों।
आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट का रुख करे, जैसा तमिलनाडु ने किया।
एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि इस विषय पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो छात्र समुदाय विश्वविद्यालय की गरिमा और स्वायत्तता की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करेगा।
ज्ञापन की प्रतियां मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, बागवानी मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष को भी भेजी गई हैं।
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