दमदार मुख्यमंत्री सुक्खु बने सबकी आंखों के तारे, चिट्टा-मुक्त हिमाचल अभियान पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू से विशेष बातचीत



Press Correspondent




चिट्टा-मुक्त हिमाचल: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू से विशेष बातचीत

(सर्किट हाउस धर्मशाला में एक विशेष साक्षात्कार)
धर्मशाला स्थित सर्किट हाउस की शांत, सुदृढ़ और अनुशासित फिज़ाओं के बीच मेरी मुलाक़ात हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू से हुई। माहौल बिल्कुल सामान्य था, परन्तु मुख्यमंत्री की आँखों में एक दृढ़ चमक थी—वही चमक, जिसने पूरे प्रदेश के एंटी-चिट्टा अभियान को देशव्यापी चर्चा का विषय बना दिया है।
सुक्खू की इस मुहिम ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी, परिणाम-संचालित और साहसी नेता के रूप में स्थापित किया है। जनता खुलकर उनके साथ खड़ी है—रैलियाँ, वॉकाथॉन, जागरण कार्यक्रम और जन-सहभागिता की उमंग ने सुक्खू को भारत के पहले ऐसे मुख्यमंत्री के रूप में पहचान दिलाई है, जो नशे के विरुद्ध इतनी व्यापक और प्रभावशाली लड़ाई लड़ रहे हैं।
इस अभियान ने उनकी छवि को पहले से कहीं अधिक मज़बूत, पारदर्शी और जनहितकारी बनाया है। पूरे राज्य में “सुक्खू–सुक्खू” की गूंज है, लोग उनकी हिम्मत और प्रतिबद्धता की प्रशंसा कर रहे हैं।

नीचे प्रस्तुत है मुख्यमंत्री के साथ गहन और खुली बातचीत—
विशेष साक्षात्कार
राजेश सूर्यवंशी : माननीय मुख्यमंत्री जी, आपके एंटी-चिट्टा अभियान ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है। इस मुहिम की शुरुआत कैसे हुई?
CM सुक्खू:
चिट्टा एक ऐसी बुराई है जिसने कई घर उजाड़ दिए। मैंने महसूस किया कि अगर आज निर्णायक लड़ाई नहीं लड़ी गई, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। इसलिए यह अभियान सिर्फ सरकारी कार्यक्रम नहीं—एक जन-अभियान है, जिसमें पूरा हिमाचल शामिल है। हमने इसे साहस, पारदर्शिता और जनता के विश्वास के साथ शुरू किया।
जनता का समर्थन अभूतपूर्व दिखाई दे रहा है। आप इसे कैसे देखते हैं?
CM सुक्खू:
यह मेरे लिए सबसे बड़ी शक्ति है। हजारों लोग वॉकाथॉन में मेरे साथ चले—महिलाएं, युवा, बुजुर्ग, बच्चे—हर किसी ने अपना योगदान दिया। जनता को विश्वास है कि यह लड़ाई सिर्फ नारों की नहीं, बल्कि व्यवहारिक कार्रवाई की है। इसी समर्थन ने अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया है।
आपने चिट्टा तस्करों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया है। क्या आप इन कार्रवाइयों पर प्रकाश डालेंगे?
CM सुक्खू:
नशा तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख़्शा नहीं जाएगा। PIT–NDPS एक्ट के तहत उम्रकैद से लेकर मौत की सजा तक के प्रावधान लागू किए गए हैं। अब यह स्पष्ट है—
जो भी चिट्टा बेचेगा, उसकी अवैध संपत्ति ज़ब्त होगी और उसे जेल की हवा खानी पड़ेगी।
क्या सरकारी कर्मियों और पुलिस विभाग के खिलाफ भी ऐसे ही कठोर कदम उठाए जाएंगे?
CM सुक्खू:
बिल्कुल। मेरी सरकार में दो टूक नीति है—
सरकारी नौकरी करते हुए अगर कोई चिट्टा कारोबार में शामिल पाया गया, तो वह सीधा बर्खास्त होगा।
नौकरी से बाहर, पेंशन खत्म, संपत्ति जब्त—यह सब कार्रवाई होगी। 60 कर्मचारी जिनमें 15 पुलिसकर्मी शामिल हैं, उनके खिलाफ हम पहले ही कठोर कदम उठा चुके हैं।
सरकारी मशीनरी में भ्रष्टाचार या नशे से जुड़े लोगों के लिए कोई जगह नहीं।
आपकी छवि इस अभियान के बाद और अधिक निखरी है। इसे आप कैसे देखते हैं?
CM सुक्खू:
मेरी प्राथमिकता सिर्फ हिमाचल का भविष्य है। अगर आज हम युवाओं को बचा पाए, तो आने वाले 20–30 वर्षों में हिमाचल देश के सबसे मजबूत राज्यों में होगा।
अगर लोग मेरी प्रशंसा कर रहे हैं, तो यह मेरे लिए जिम्मेदारी और बढ़ाने वाली बात है।

इस अभियान का अंतिम लक्ष्य क्या है?
CM सुक्खू:
सरल है—
“चिट्टा-मुक्त हिमाचल।”
हमारे बच्चे सुरक्षित होंगे, तभी प्रदेश सुरक्षित और मजबूत होगा। यह सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति है, जिसमें हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है।

धर्मशाला के सर्किट हाउस में यह मुलाक़ात सिर्फ एक इंटरव्यू नहीं, बल्कि एक संकल्प का दस्तावेज़ साबित हुई।
चिट्टा के खिलाफ मुख्यमंत्री सुक्खू की यह लड़ाई हिमाचल से निकलकर पूरे भारत के लिए एक प्रेरणा बन चुकी है। उनका नेतृत्व, ईमानदार दृढ़ता और जनता का अपार समर्थन मिलकर एक ऐसी कहानी लिख रहे हैं जिसे आने वाली पीढ़ियाँ याद रखेंगी।











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