20 रुपये में चमत्कार : मेला मल सूद रोटरी आई हॉस्पिटल, मारंडा बना उत्तरी भारत का भरोसेमंद एवं सर्वश्रेष्ठ आई हॉस्पिटल
हिमाचल प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ आई हॉस्पिटल











मेला मल सूद रोटरी आई हॉस्पिटल, मारंडा बना उत्तरी भारत का भरोसेमंद एवं सर्वश्रेष्ठ आई हॉस्पिटल
चार दशक पहले देखा गया सपना हुआ साकार, हिमाचल से देशभर के मरीजों को मिल रही विश्वस्तरीय सुविधा
✍️ मारंडा (पालमपुर) : रजित चित्रा,
विशेष संवाददाता

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के पालमपुर क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित मेला मल सूद रोटरी आई हॉस्पिटल, मारंडा आज नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में एक मिसाल बन चुका है। चार दशक पहले स्वर्गीय डॉ. शिव कुमार द्वारा शुरू किया गया यह चैरिटेबल संस्थान आज न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि पूरे उत्तरी भारत के सर्वश्रेष्ठ नेत्र चिकित्सालयों में गिना जा रहा है।
शून्य से शुरू हुआ यह अस्पताल आज अत्याधुनिक तकनीक, अनुभवी डॉक्टरों और पारदर्शी कार्यप्रणाली के कारण देशभर के मरीजों का भरोसा जीत चुका है। अस्पताल में अब तक लगभग एक करोड़ मरीजों की OPD पूरी होने की ओर है, जो इसकी विश्वसनीयता और लोकप्रियता को दर्शाता है।





मेला मल सूद रोटरी आई हॉस्पिटल, मारंडा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ मात्र 20 रुपये की पर्ची में मरीजों की आँखों की जाँच करोड़ों रुपये की अत्याधुनिक मशीनों से की जाती है। यह सुविधा न केवल हिमाचल, बल्कि देश के किसी अन्य अस्पताल में संभव नहीं है। इसी कारण गंभीर से गंभीर नेत्र रोगों का समय पर और सटीक निदान यहाँ संभव हो पा रहा है।
अस्पताल में मोतियाबिंद (फेको व लेज़र सर्जरी), रेटिना सर्जरी, डायबिटिक रेटिनोपैथी, रेटिनल डिटैचमेंट, ग्लूकोमा, कॉर्निया ट्रांसप्लांट, बाल नेत्र रोग, लेज़िक सर्जरी, यूवाइटिस, ऑक्यूलोप्लास्टी और लो-विज़न रिहैबिलिटेशन जैसी उन्नत सुविधाएँ उपलब्ध हैं। आने वाले समय में और भी करोड़ों रुपये की आधुनिक मशीनें यहाँ स्थापित की जा रही हैं, जिससे यह अस्पताल एक पूर्ण सुपर स्पेशलिटी आई हॉस्पिटल के रूप में स्थापित होगा।
इस अस्पताल की सबसे बड़ी ताकत यहाँ कार्यरत समर्पित, अनुभवी, मृदुभाषी और मरीज-हितैषी डॉक्टरों, नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ की टीम है। मरीजों को यहाँ केवल इलाज ही नहीं, बल्कि सम्मान और अपनापन भी मिलता है। यही कारण है कि यहाँ नेत्र शल्य-क्रियाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, और परिणाम देश के बड़े अस्पतालों को भी पीछे छोड़ रहे हैं।
आज हालात यह हैं कि जम्मू, श्रीनगर, दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा, राजस्थान, लेह-लद्दाख सहित हिमाचल के दूरस्थ क्षेत्रों से भी मरीज इलाज के लिए मारंडा पहुँच रहे हैं। यह पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है।
जहाँ कई निजी अस्पताल मरीजों से चार-पाँच गुना अधिक शुल्क वसूलते हैं, वहीं रोटरी आई हॉस्पिटल, मारंडा ईमानदारी और पारदर्शिता का उदाहरण है। यहाँ मोतियाबिंद और रेटिना सर्जरी में उच्च गुणवत्ता के प्रमाणित लेंस लगाए जाते हैं। अन्य अस्पतालों में जो सर्जरी 40–50 हजार रुपये में होती है, वही यहाँ मात्र 17 हजार रुपये से शुरू होती है।
यह अस्पताल नो-प्रॉफिट, नो-लॉस के सिद्धांत पर चलते हुए मानव सेवा को सर्वोपरि रखता है। गरीब और जरूरतमंद मरीजों को सस्ता या निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराना इसकी पहचान है। साथ ही यह संस्थान सैकड़ों स्थानीय युवाओं को रोजगार देकर सामाजिक दायित्व भी निभा रहा है।
इस उल्लेखनीय प्रगति के पीछे निदेशक डॉ. सुधीर सल्होत्रा, एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. रोहित गर्ग, जनरल मैनेजर श्री राघव शर्मा और पूरी प्रबंधन टीम का दूरदर्शी नेतृत्व है। उनके कुशल संचालन में मेला मल सूद रोटरी आई हॉस्पिटल, मारंडा दिन-रात प्रगति के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
निस्संदेह, यह अस्पताल आज यह साबित कर चुका है कि जब उद्देश्य सेवा हो और नेतृत्व ईमानदार हो, तो पहाड़ों से भी पूरे देश को रोशनी दी जा सकती है।
देश-प्रदेश से आए मरीजों की जुबानी: रोटरी आई हॉस्पिटल, मारंडा पर विश्वास
लाहौल-स्पीति (केलांग) – तेनजिन आंगमो (महिला):
“हम जैसे दुर्गम क्षेत्र के लोगों के लिए यह अस्पताल किसी वरदान से कम नहीं है। इतनी आधुनिक जाँच और इलाज मात्र 20 रुपये में मिलना, देश में कहीं संभव नहीं।”
भरमौर (चम्बा) – रमेश ठाकुर (पुरुष):
“मेरी आँखों की गंभीर बीमारी थी। यहाँ डॉक्टरों ने बड़े प्यार से इलाज किया। ऑपरेशन सफल रहा, अब साफ दिखाई देता है।”
लेह-लद्दाख – सोनम वांगचुक (पुरुष):
“लद्दाख से मारंडा तक आना आसान नहीं था, लेकिन यहाँ का इलाज और व्यवहार देखकर सारी मेहनत सफल लगी।”
श्रीनगर – नसीमा बेगम (महिला):
“कई बड़े अस्पतालों में गई, लेकिन इतना भरोसा और पारदर्शिता कहीं नहीं मिली। यहाँ इलाज के साथ सम्मान भी मिला।”
दिल्ली – अनिल वर्मा (पुरुष):
“दिल्ली जैसे शहर में इलाज बहुत महंगा है। यहाँ वही सर्जरी कम खर्च में, बेहतर गुणवत्ता के साथ हुई।”
चंडीगढ़ – सविता शर्मा (महिला):
“डॉक्टर बहुत सौम्य और स्टाफ बेहद सहयोगी है। ऐसा लगता है जैसे अपने परिवार में इलाज करा रहे हों।”
मनाली – देवेंद्र नेगी (पुरुष):
“परिणाम इतने अच्छे हैं कि अब मनाली से लोग खुद-ब-खुद यहीं आने लगे हैं।”
कुल्लू – मीना देवी (महिला):
“गरीब मरीजों के लिए यह अस्पताल उम्मीद की आखिरी किरण है। कई जांचें मुफ्त में हुईं।”
रामपुर (शिमला) – हेमराज वर्मा (पुरुष):
“यह अस्पताल पैसे कमाने के लिए नहीं, सेवा के लिए चलता है। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।”
शिमला – प्रीति चौहान (महिला):
“इतनी साफ-सुथरी व्यवस्था, फ्री पार्किंग और आसान पहुँच, हिमाचल में कहीं नहीं।”
कोटखाई – सुशील ठाकुर (पुरुष):
“डॉ. सुधीर सल्होत्रा और उनकी टीम पर पूरा भरोसा है। इलाज में कोई धोखाधड़ी नहीं।”
मंडी – कमला देवी (महिला):
“मेरी मोतियाबिंद की सर्जरी बहुत सफल रही। अब दूसरों को भी यहीं भेजती हूँ।”
पठानकोट – राजीव कुमार (पुरुष):
“नेशनल हाईवे पर स्थित होने से पहुँचना आसान है। सुविधाएँ बड़े शहरों से बेहतर हैं।”
हरियाणा – सुनीता रानी (महिला):
“हरियाणा में यही सर्जरी चार गुना महंगी थी। यहाँ कम खर्च में बेहतर इलाज मिला।”
जम्मू – राकेश सिंह (पुरुष):
“पूरा सिस्टम पारदर्शी है। यही कारण है कि दूर-दूर से लोग यहाँ आते हैं।”
चम्बा – आशा देवी (महिला):
“गरीबों के लिए यह अस्पताल भगवान का रूप है। मुफ्त इलाज ने मेरी जिंदगी बदल दी।”




Press Correspondent






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