BREAKING: स्कूल बस हादसा—ब्रेक फेल या सिस्टम फेल? बच्चों की जान दांव पर

स्कूल प्रबंधन पर बसों की रिपेयर न करवाने का आरोप

BREAKING | स्कूल बस हादसा: बच्चों की जान दांव पर!

Byline

Vijay Sood

Bureau Chief

VIJAY SOOD
SENIOR CORRESPONDENT

 

ब्रेक फेल या लापरवाही? जांच के घेरे में स्कूल प्रबंधन**

पालमपुर | सुबह 8:30 बजे
आज सुबह एवीएम स्कूल पाहड़ा की निजी स्कूल बस लाहट के पास पलट गई, जिससे बस में सवार मासूम बच्चों में अफरा-तफरी मच गई। हादसे के वक्त बस रोज़ की तरह बच्चों को स्कूल लेकर जा रही थी। अचानक बस के अनियंत्रित होते ही सड़क पर पलटने से बच्चों की चीख-पुकार गूंज उठी।

स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू किया और बच्चों को बस से बाहर निकाला। सूचना मिलते ही एंबुलेंस मौके पर पहुंची। 15 से 20 बच्चे घायल बताए जा रहे हैं, जबकि बस कंडक्टर को भी चोटें आई हैं। सभी घायलों को पालमपुर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

ड्राइवर की सूझ-बूझ या किस्मत का साथ?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ड्राइवर की सूझ-बूझ से बड़ा हादसा टल गया, अन्यथा यह दुर्घटना जानलेवा साबित हो सकती थी। लेकिन सवाल यह है—

अगर ड्राइवर ने हालात संभाले, तो बस अचानक पलटी क्यों?
जांच के घेरे में स्कूल बस की फिटनेस
प्रारंभिक जानकारी में ब्रेक फेल होने की आशंका जताई जा रही है। यदि यह सच है तो यह सीधा-सीधा स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही को दर्शाता है।
👉 क्या बस की फिटनेस जांच समय पर हुई थी?
👉 क्या आरटीओ से वैध फिटनेस सर्टिफिकेट मौजूद है?
👉 क्या बस बच्चों की संख्या के अनुसार सुरक्षित क्षमता में चल रही थी?
👉 आख़िरी बार बस की मैकेनिकल सर्विस कब हुई थी?
इन सभी सवालों के जवाब अब जांच का विषय बन चुके हैं।

प्रशासनिक चुप्पी भी सवालों के घेरे में

हैरानी की बात यह है कि इतनी गंभीर घटना के बाद भी स्कूल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं अभिभावकों में भारी रोष है और वे दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सरकार और शिक्षा विभाग से सीधी मांग
यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है।
सभी निजी स्कूल बसों की तत्काल जांच
लापरवाह स्कूल प्रबंधन पर आपराधिक कार्रवाई
बच्चों की सुरक्षा से समझौता करने वाले संस्थानों पर मान्यता रद्द करने की कार्रवाई हो।

EXCLUSIVE सवाल
❗ अगर आज कोई बच्चा गंभीर रूप से घायल होता, तो जिम्मेदार कौन होता?
❗ क्या स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा से ज़्यादा मुनाफ़ा प्यारा है?
🛑 बच्चों की ज़िंदगी प्रयोगशाला नहीं है।
हर बस नहीं—हर ज़िम्मेदारी की जांच होनी चाहिए।

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