चाय नर्सरी घोटाला: लाखों का नुकसान, किसानों का हक छीना, लाखों के पौधे मात्र 8 हज़ार में बेच डाले 💥पालमपुर चाय भवन के तकनीकी अधिकारी पर आरोप—4 से 6 लाख रुपए के 4000 पौधे जम्मू के कठुआ में भेजे, नियमों की अनदेखी कर सरकार को लगाया लाखों का चूना; अब जांच की मांग तेज़

Sukhu Govt
Dr Sushama Sood
Dr. Swati Katoch Sood, & Dr. Anubhav Sood, Gems of Dental Radiance
DENTAL RADIANCE HOSPITAL PALAMPUR TOUCHING SKY
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Dr Shiv Kumar, Father of Rotary Eye Hospiral, Internationally acclaimed Social Worker & Founder CHAIRMAN, Rotary Eye Foundation
ROTARY EYE HOSPITAL MARANDA
Dr. Sudhir Salhotra, TOP TEN Retina Surgeon of India, Director, Rotary Eye Hospital, Maranda
Rotary Eye Hospital Maranda Palampur
Dr. Sudhir Salhotra, TOP TEN Retina Surgeon of India, Director, Rotary Eye Hospital, Maranda
RAGHAV SHARMA, GM, Rotary Eye Hospital, Maranda
Rotary

🌳चाय नर्सरी घोटाला: लाखों का नुकसान, किसानों का हक छीना, लाखों के पौधे मात्र 8 हज़ार में बेच डाले

💥पालमपुर चाय भवन के तकनीकी अधिकारी पर आरोप—4 से 6 लाख रुपए के 4000 पौधे जम्मू के कठुआ में भेजे, नियमों की अनदेखी कर सरकार को लगाया लाखों का चूना; अब जांच की मांग तेज़

✍️सम्पादकीय

राजेश सूर्यवंशी, एडिटर-इन-चीफ, HR मीडिया ग्रुप

👉हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा क्षेत्र देशभर में अपनी चाय उत्पादन की परंपरा और गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। प्रदेश सरकार ने इस उद्योग को बढ़ावा देने और छोटे चाय उत्पादकों को सहारा देने के लिए पालमपुर स्थित चाय भवन कालू दी हट्टी में विशेष व्यवस्था की है। यहां पर चाय की नर्सरी के पौधे सब्सिडी पर मात्र 2 रुपये प्रति पौधा दर से स्थानीय उत्पादकों को उपलब्ध कराए जाते हैं, जबकि नर्सरी में कोई भी पौधा 100 से 150 रुपये तक बिकता है। सरकार का उद्देश्य है कि मिट्टी की जांच और feasibility रिपोर्ट के बाद उपयुक्त किसानों को यह सुविधा मिले, ताकि पौधे अनुकूल परिस्थितियों में पनप सकें और प्रदेश की चाय उद्योग को मजबूती मिले। इन पौधों को उगाने, पालन-पोषण करने और रखरखाव पर भारी-भरकम खर्च होता है।
लेकिन हाल ही में सामने आया मामला चाय भवन की इस पूरी नीति और नीयत पर सवाल खड़े करता है।
पालमपुर चाय भवन के तकनीकी अधिकारी (टी) द्वारा जम्मू के कठुआ जिले में एक साथ 4000 पौधे औने-पौने दामों पर बेचने का खुलासा हुआ है। विभागीय अनुमति के बिना ही प्रदेश से बाहर पौधों को बेचना सीधा नियम उल्लंघन है। किसी भी नर्सरी में इन पौधों की कीमत लगभग 4 से 6 लाख रुपये बनती थी, उन्हें मात्र 8000 रुपये में बेच दिया गया। यह न केवल हिमाचल के चाय उत्पादकों का हक छीनना है, बल्कि सरकार को लाखों रुपये का वित्तीय नुकसान भी पहुंचाना है।
सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि इन पौधों का भविष्य क्या होगा? कठुआ क्षेत्र चाय उत्पादन के लिए उपयुक्त नहीं है, न वहां की मिट्टी और न ही जलवायु। ऐसे में यह सौदा केवल रेवड़ियों की तरह पौधों को बांटने जैसा है। इससे न तो प्रदेश के किसानों को लाभ होगा और न ही सरकार के खर्च का कोई औचित्य सिद्ध होता है।
और भी चिंताजनक तथ्य यह है कि इस तरह की अनियमितताएं पहली बार उजागर हुई हैं, लेकिन आशंका है कि पूर्व में भी ऐसे कई गैरकानूनी सौदे हो चुके होंगे जिनका कभी संज्ञान ही नहीं लिया गया। अगर तत्काल जांच नहीं हुई तो यह कुप्रथा भविष्य में भी जारी रहेगी।
सरकार और कृषि विभाग को चाहिए कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। यह सिर्फ एक वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि प्रदेश के चाय उत्पादकों के अधिकारों पर सीधा कुठाराघात है।
हिमाचल की चाय केवल एक फसल नहीं, बल्कि प्रदेश की पहचान और परंपरा है। अगर ऐसे भ्रष्टाचार और लापरवाही को बर्दाश्त किया गया तो यह उद्योग धीरे-धीरे खोखला हो जाएगा। अब समय आ गया है कि पारदर्शिता, जवाबदेही और कठोर कार्रवाई के साथ सरकार यह संदेश दे कि जनता के पैसों और किसानों के अधिकारों की अनदेखी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
👉तकनीकी अधिकारी (टी) का स्पष्टीकरण
इस पूरे मामले पर जब पालमपुर चाय भवन के टैक्निकल अधिकारी सुनील पटियाल से बात की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि कठुआ (जम्मू) के कृषि विभाग को 4000 पौधे 2 रुपये प्रति पौधा की दर से बेचे गए। उनका कहना था कि उन्हें कठुआ एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट से औपचारिक डीमांड प्राप्त हुई थी, हमारे पास पौधे पड़े थे और वे बेच दिए।
उल्लेखनीय है कि नर्सरी में कोई भी पौधा 100-150 रुपए में बिकता है।
हालांकि उनका यह स्पष्टीकरण विभागीय नियमों और नीतियों के अनुरूप नहीं ठहरता। अब गेंद सरकार और जांच एजेंसियों के पाले में है कि वह इस दलील को कितनी मान्यता देती है।
उल्लेखनीय है कि पालमपुर में “चाय भवन” कोई एक विशिष्ट स्थान नहीं है, बल्कि यह इस क्षेत्र के प्रसिद्ध चाय बागानों और चाय उत्पादन से जुड़े पूरे इलाके को संदर्भित करता है, जिसके कारण पालमपुर को “उत्तर पश्चिम भारत की चाय राजधानी” कहा जाता है. पर्यटक यहाँ के हरे-भरे चाय बागानों में घूम सकते हैं, पालमपुर सहकारी चाय कारखाने का दौरा कर सकते हैं, और इस प्रक्रिया को देख सकते हैं कि चाय कैसे उगाई और संसाधित की जाती है।
Two Years of Sukhu Govt
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